श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.64.1 
सुग्रीवेणैवमुक्तस्तु हृष्टो दधिमुख: कपि:।
राघवं लक्ष्मणं चैव सुग्रीवं चाभ्यवादयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव की यह बात सुनकर प्रसन्न वानर दधिमुख ने भगवान राम, लक्ष्मण और सुग्रीव को प्रणाम किया।
 
On hearing Sugreeva say this, the pleased monkey Dadhimukh bowed to Lord Rama, Lakshmana and Sugreeva.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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