श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.63.7 
एभि: प्रधर्षणायां च वारितं वनपालकै:।
मामप्यचिन्तयन् देव भक्षयन्ति वनौकस:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जब हनुमानजी और अन्य वानरों ने मधुवन को लूटना आरम्भ किया, तब हमारे वनरक्षकों ने उन्हें रोकने का प्रयत्न किया; परन्तु उन वानरों ने न तो उनकी और न ही मेरी ओर ध्यान दिया और वहीं फल खाते रहे।
 
O Lord! When Hanuman and other monkeys started plundering Madhuvan, our forest guards tried to stop them; but those monkeys did not pay any heed to them or even to me and kept eating the fruits there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)