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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान
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श्लोक 4
श्लोक
5.63.4
स समाश्वासितस्तेन सुग्रीवेण महात्मना।
उत्थाय स महाप्राज्ञो वाक्यं दधिमुखोऽब्रवीत्॥ ४॥
अनुवाद
महात्मा सुग्रीव के ऐसा आश्वासन देने पर महाज्ञानी दधिमुख खड़े होकर बोले- ॥4॥
On Mahatma Sugriva giving such assurance, the great wise Dadhimukh stood up and said – 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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