श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.63.3 
किं सम्भ्रमाद्धितं कृत्स्नं ब्रूहि यद् वक्तुमर्हसि।
कच्चिन्मधुवने स्वस्ति श्रोतुमिच्छामि वानर॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'बताओ, किसके भय से तुम यहाँ आये हो। जो कुछ भी पूर्णतः कल्याणकारी हो, वह मुझे बताओ; क्योंकि तुम सब कुछ बताने में समर्थ हो। मधुवन में सब कुशल तो है? वानर! मैं तुम्हारे मुख से यह सब सुनना चाहता हूँ।'॥3॥
 
‘Tell me, because of whose fear have you come here. Tell me whatever is completely beneficial; because you are capable of telling everything. Is everything fine in Madhuvan? Monkey! I want to hear all this from your mouth.'॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)