श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  5.63.28-29h 
तत: प्रहृष्टो धर्मात्मा लक्ष्मण: सहराघव:।
श्रुत्वा कर्णसुखां वाणीं सुग्रीववदनाच्च्युताम्॥ २८॥
प्राहृष्यत भृशं रामो लक्ष्मणश्च महायशा:।
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के ये कर्णप्रिय वचन सुनकर श्री रामचन्द्रजी सहित धर्मात्मा लक्ष्मण अत्यन्त प्रसन्न हुए। श्री रामजी के आनन्द की सीमा न रही और यशस्वी लक्ष्मण भी हर्ष से भर उठे। 28 1/2॥
 
Hearing these ear-pleasing words from Sugriva, virtuous Lakshman along with Shri Ramchandraji became very happy. There was no limit to Shri Ram's joy and the famous Lakshman also burst into joy. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)