श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 22-25
 
 
श्लोक  5.63.22-25 
अङ्गदप्रमुखैर्वीरैर्हतं मधुवनं किल॥ २२॥
विचित्य दक्षिणामाशामागतैर्हरिपुङ्गवै:।
आगतैश्चाप्रधृष्यं तद्धतं मधुवनं हि तै:॥ २३॥
धर्षितं च वनं कृत्स्नमुपयुक्तं तु वानरै:।
पातिता वनपालास्ते तदा जानुभिराहता:॥ २४॥
एतदर्थमयं प्राप्तो वक्तुं मधुरवागिह।
नाम्ना दधिमुखो नाम हरि: प्रख्यातविक्रम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘सीताजी का पता लगाकर दक्षिण दिशा से लौटे हुए अंगद आदि वीर वानरों ने उस मधुवन पर आक्रमण कर दिया है, जिसे रौंदना किसी के लिए भी असम्भव था। उन्होंने मधुवन को नष्ट कर दिया, तहस-नहस कर दिया और सब वानरों ने मिलकर सम्पूर्ण वन का मनचाहा उपयोग किया। इतना ही नहीं, उन्होंने वनरक्षकों पर भी आक्रमण किया और उन्हें घुटनों से मारकर घायल कर दिया। यह बताने के लिए यह प्रसिद्ध एवं वीर वानर, जो अत्यन्त मधुरभाषी है, यहाँ आया है।॥ 22-25॥
 
‘The brave monkeys like Angad etc. who had returned from the south after finding Sitaji, have attacked the Madhuvan, which was impossible for anyone to trample. They destroyed the Madhuvan, devastated it and all the monkeys together used the entire forest in a way they wanted. Not only this, they also attacked the forest guards and injured them by hitting them with their knees. To tell this, this famous and brave monkey Dadhimukh, who is very sweet-spoken, has come here.॥ 22-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)