श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  5.63.21-22h 
जाम्बवान् यत्र नेता स्यादङ्गदश्च महाबल:॥ २१॥
हनूमांश्चाप्यधिष्ठाता न तत्र गतिरन्यथा।
 
 
अनुवाद
जिस दल के नेता जाम्बवान और महाबली अंगद हों तथा जिसके अध्यक्ष हनुमान हों, उसके लिए विपरीत परिणाम - असफलता प्राप्त करना संभव नहीं है । 21 1/2॥
 
It is not possible for a party whose leaders are Jambavan and Mahabali Angad and whose president is Hanuman to get the opposite result - failure. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)