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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान
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श्लोक 14
श्लोक
5.63.14
किमयं वानरो राजन् वनप: प्रत्युपस्थित:।
किं चार्थमभिनिर्दिश्य दु:खितो वाक्यमब्रवीत्॥ १४॥
अनुवाद
"राजन्! यह वनरक्षक वानर यहाँ क्यों आया है? और इस दुःख भरी बात में इसने किस ओर संकेत किया है?"
‘King! Why has this monkey, who protects the forest, come here? And what has he pointed towards in this sad talk?’
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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