श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.63.11 
पाणिभिर्निहता: केचित् केचिज्जानुभिराहता:।
प्रकृष्टाश्च तदा कामं देवमार्गं च दर्शिता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘किसी को थप्पड़ मारे गए, किसी को घुटनों से रगड़ा गया, बहुतों को इच्छानुसार घसीटा गया और कितनों को पीठ के बल पटककर आकाश दिखाया गया॥11॥
 
‘Some were slapped, some were rubbed with knees, many were dragged as per their wish and some were thrown on their backs and shown the sky.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)