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ramayan 5.62.35: और पलक झपकते ही वे उस स्थान पर पहुँच गये जहाँ सूर्यपुत्र बुद्धिमान वानरराज सुग्रीव बैठे थे।   |   ramayan सर्ग 5.62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.62.35 
निमेषान्तरमात्रेण स हि प्राप्तो वनालय:।
सहस्रांशुसुतो धीमान् सुग्रीवो यत्र वानर:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
और पलक झपकते ही वे उस स्थान पर पहुँच गये जहाँ सूर्यपुत्र बुद्धिमान वानरराज सुग्रीव बैठे थे।
 
And in the blink of an eye they reached the place where the wise monkey king Sugreeva, son of the Sun, was sitting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)