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ramayan 5.62.31: महात्मा सुग्रीव को यह मधुवन बहुत प्रिय है। यह उनके पूर्वजों का दिव्य वन है। इसमें देवताओं का भी प्रवेश कठिन है॥31॥   |   ramayan सर्ग 5.62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.62.31 
इष्टं मधुवनं ह्येतत् सुग्रीवस्य महात्मन:।
पितृपैतामहं दिव्यं देवैरपि दुरासदम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महात्मा सुग्रीव को यह मधुवन बहुत प्रिय है। यह उनके पूर्वजों का दिव्य वन है। इसमें देवताओं का भी प्रवेश कठिन है॥31॥
 
‘Mahatma Sugriv loves this Madhuvan very much. This is the divine forest of his forefathers. It is difficult even for the gods to enter it.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)