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स भग्नबाहूरुमुखो विह्वल: शोणितोक्षित:।
प्रमुमोह महावीरो मुहूर्तं कपिकुञ्जर:॥ २७॥
अनुवाद
उनकी भुजाएँ, जाँघें और मुख सब टूट गए। वे रक्त से लथपथ होकर व्याकुल हो गए। महान कपिकुंजर दधिमुख दो घंटे तक वहीं अचेत पड़े रहे।
His arms, thighs and face were all broken. He was drenched in blood and became distraught. The great Kapikunjar Dadhimukh remained lying there unconscious for two hours.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥