Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.62.26: वह मधुपान से मतवाला हो रहा था, अतः 'यह मेरा नाना है' ऐसा सोचकर उसने उस पर दया न की, तत्क्षण उसे बड़े जोर से भूमि पर पटक दिया और रगड़ने लगा॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 5.62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.62.26 
मदान्धो न कृपां चक्रे आर्यकोऽयं ममेति स:।
अथैनं निष्पिपेषाशु वेगेन वसुधातले॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह मधुपान से मतवाला हो रहा था, अतः 'यह मेरा नाना है' ऐसा सोचकर उसने उस पर दया न की, तत्क्षण उसे बड़े जोर से भूमि पर पटक दिया और रगड़ने लगा॥ 26॥
 
He was getting intoxicated by drinking honey, so thinking that 'this is my maternal grandfather', he did not show mercy to him. He immediately threw him on the ground with great force and started rubbing him.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)