Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.62.17: वे सब सेवक अत्यन्त व्याकुल हो उठे और दधिमुख के पास जाकर बोले - 'प्रभु! हनुमान् जी के प्रोत्साहन से उनके समूह के सब वानरों ने बलपूर्वक मधुवन को नष्ट कर दिया, हमें नीचे गिराकर घुटनों से रगड़ा और पीठ के बल पटककर आकाश का दर्शन कराया।'॥17॥ | ramayan सर्ग 5.62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब्रुवन् परमोद्विग्ना गत्वा दधिमुखं वच:।
हनूमता दत्तवरैर्हतं मधुवनं बलात्।
वयं च जानुभिर्घृष्टा देवमार्गं च दर्शिता:॥ १७॥
अनुवाद
वे सब सेवक अत्यन्त व्याकुल हो उठे और दधिमुख के पास जाकर बोले - 'प्रभु! हनुमान् जी के प्रोत्साहन से उनके समूह के सब वानरों ने बलपूर्वक मधुवन को नष्ट कर दिया, हमें नीचे गिराकर घुटनों से रगड़ा और पीठ के बल पटककर आकाश का दर्शन कराया।'॥17॥
All those servants became very agitated and went to Dadhimukh and said - 'Prabhu! With the encouragement of Hanuman ji, all the monkeys of his group forcefully destroyed Madhuvan, threw us down and rubbed us with their knees and threw us on our backs and made us see the sky.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥