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ramayan 5.62.13: कोई एक दूसरे पर मधु फेंक रहे थे, कोई ठोकर खाकर गिर रहे थे, कोई गरज रहे थे और कोई पक्षियों की तरह खुशी से चहचहा रहे थे॥13॥   |   ramayan सर्ग 5.62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.62.13 
क्षिपन्त्यपि तथान्योन्यं स्खलन्ति च तथापरे।
केचित् क्ष्वेडान् प्रकुर्वन्ति केचित् कूजन्ति हृष्टवत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कोई एक दूसरे पर मधु फेंक रहे थे, कोई ठोकर खाकर गिर रहे थे, कोई गरज रहे थे और कोई पक्षियों की तरह खुशी से चहचहा रहे थे॥13॥
 
Some threw honey on each other, some stumbled and fell, some roared and some chirped in joy like birds.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)