श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.61.24 
नखैस्तुदन्तो दशनैर्दशन्त-
स्तलैश्च पादैश्च समापयन्त:।
मदात् कपिं ते कपय: समन्ता-
न्महावनं निर्विषयं च चक्रु:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वे वानरों ने मद के वशीभूत होकर कपिवर दधिमुख को नखों से नोचना, दाँतों से काटना तथा थप्पड़ों और लातों से तब तक पीटना आरम्भ किया जब तक वह अधमरा न हो गया। इस प्रकार उन्होंने उस विशाल वन को सब ओर से फल आदि से शून्य कर दिया॥ 24॥
 
Under the influence of intoxication, those monkeys started clawing Kapivara Dadhimukh with their nails, biting him with their teeth and beating him with slaps and kicks till he was half dead. In this way, they made that huge forest empty of fruits etc. from all sides.॥ 24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे एकषष्टितम: सर्ग:॥ ६१॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें इकसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६१॥
 
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