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ramayan 5.61.23: जब दधमुख ने उन वानरों को रोकना चाहा, जिनकी गति मद के कारण वश में न रही, तो वे सब मिलकर उसे इधर-उधर घसीटने लगे। उन्हें यह नहीं मालूम था कि वनरक्षक पर आक्रमण करने के कारण उन्हें राजदरबार से दण्ड मिलेगा। इसलिए वे सब निर्भय होकर उसे इधर-उधर घसीटने लगे॥23॥   |   ramayan सर्ग 5.61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.61.23 
स तैर्मदादप्रतिवार्यवेगै-
र्बलाच्च तेन प्रतिवार्यमाणै:।
प्रधर्षणे त्यक्तभयै: समेत्य
प्रकृष्यते चाप्यनवेक्ष्य दोषम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब दधमुख ने उन वानरों को रोकना चाहा, जिनकी गति मद के कारण वश में न रही, तो वे सब मिलकर उसे इधर-उधर घसीटने लगे। उन्हें यह नहीं मालूम था कि वनरक्षक पर आक्रमण करने के कारण उन्हें राजदरबार से दण्ड मिलेगा। इसलिए वे सब निर्भय होकर उसे इधर-उधर घसीटने लगे॥23॥
 
When Dadhmukha tried to stop the monkeys whose speed had become impossible to control due to intoxication, all of them together started dragging him here and there. They did not realize that they would receive punishment from the royal court for attacking the forest guard. Therefore, all of them fearlessly started dragging him here and there.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)