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ramayan 5.61.2: तब वे समस्त महाप्रतापी वानर पवनपुत्र हनुमान्‌जी को आगे रखकर मन में प्रसन्न होकर महेन्द्रगिरि के शिखर से कूदने लगे॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.61.2 
प्रीतिमन्तस्तत: सर्वे वायुपुत्रपुर:सरा:।
महेन्द्राग्रात् समुत्पत्य पुप्लुवु: प्लवगर्षभा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब वे समस्त महाप्रतापी वानर पवनपुत्र हनुमान्‌जी को आगे रखकर मन में प्रसन्न होकर महेन्द्रगिरि के शिखर से कूदने लगे॥2॥
 
Then all those great monkeys, keeping Hanuman, the son of the wind, in front, feeling happy in their hearts, started jumping from the peak of Mahendragiri. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)