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ramayan 5.61.18: बहुत से वानर बड़े वेग से पृथ्वी से दौड़कर बड़े-बड़े वृक्षों की चोटियों पर पहुँच जाते। एक गाता हुआ उसके पास जाता और दूसरा हँसता हुआ उसके पास जाता। और दूसरा हँसता हुआ उसके पास जाता और जोर-जोर से रोता हुआ जाता।॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.61.18 
महीतलात् केचिदुदीर्णवेगा
महाद्रुमाग्राण्यभिसम्पतन्ति।
गायन्तमन्य: प्रहसन्नुपैति
हसन्तमन्य: प्ररुदन्नुपैति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बहुत से वानर बड़े वेग से पृथ्वी से दौड़कर बड़े-बड़े वृक्षों की चोटियों पर पहुँच जाते। एक गाता हुआ उसके पास जाता और दूसरा हँसता हुआ उसके पास जाता। और दूसरा हँसता हुआ उसके पास जाता और जोर-जोर से रोता हुआ जाता।॥18॥
 
Many monkeys with great speed would run from the earth and reach the tops of big trees. One would sing and the other would go to him laughing. Another would go to the laughing one crying loudly.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)