| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 5.61.16  | गायन्ति केचित् प्रहसन्ति केचि-
न्नृत्यन्ति केचित् प्रणमन्ति केचित्।
पतन्ति केचित् प्रचरन्ति केचित्
प्लवन्ति केचित् प्रलपन्ति केचित्॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | कोई गा रहे थे, कोई हँस रहे थे, कोई नाच रहे थे, कोई प्रणाम कर रहे थे, कोई गिर रहे थे, कोई जोर-जोर से चल रहे थे, कोई उछल-कूद कर रहे थे और कोई बड़बड़ा रहे थे॥16॥ | | | | Some were singing, some were laughing, some were dancing, some were saluting, some were falling down, some were walking vigorously, some were jumping and skipping and some were blabbering.॥ 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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