श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.61.15 
ततश्चानुमता: सर्वे सुसंहृष्टा वनौकस:।
मुदिताश्च ततस्ते च प्रनृत्यन्ति ततस्तत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार से अनुमति पाकर सभी बंदर बहुत खुश हुए और खुशी से इधर-उधर नाचने लगे।
 
All the monkeys were very happy after getting the permission from the prince. They started dancing here and there in joy. 15.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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