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ramayan 5.60.20: राजकुमार! आप जो भी देखें या सोचें, यह विचार हमारे लिए उपयुक्त है। ऐसा नहीं है कि हम इसे नहीं कर सकते; तथापि इस विषय में प्रभु श्रीराम का जो भी निर्णय हो, उसके अनुसार ही आप कार्य की सफलता पर दृष्टि रखें।'   |   ramayan सर्ग 5.60: अङ्गद का लङ्का को जीतकर सीता को ले आने का उत्साहपूर्ण विचार और जाम्बवान् के द्वारा उसका निवारण   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 60: अङ्गद का लङ्का को जीतकर सीता को ले आने का उत्साहपूर्ण विचार और जाम्बवान् के द्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.60.20 
न तावदेषा मतिरक्षमा नो
यथा भवान् पश्यति राजपुत्र।
यथा तु रामस्य मतिर्निविष्टा
तथा भवान् पश्यतु कार्यसिद्धिम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! आप जो भी देखें या सोचें, यह विचार हमारे लिए उपयुक्त है। ऐसा नहीं है कि हम इसे नहीं कर सकते; तथापि इस विषय में प्रभु श्रीराम का जो भी निर्णय हो, उसके अनुसार ही आप कार्य की सफलता पर दृष्टि रखें।'
 
Prince! Whatever you see or think, this idea is suitable for us. It is not that we cannot do it; however, whatever is the decision of Lord Shri Ram in this matter, you should keep your eyes on the success of the task accordingly.'
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे षष्टितम: सर्ग:॥ ६०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें साठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)