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ramayan 5.6.4: वह महल चांदी की परत चढ़ी हुई चित्रकारी, स्वर्ण जड़ित दरवाजे, विशाल, अद्भुत बरामदे और सुंदर द्वारों से सुसज्जित था।   |   ramayan सर्ग 5.6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.6.4 
रूप्यकोपहितैश्चित्रैस्तोरणैर्हेमभूषणै:।
विचित्राभिश्च कक्ष्याभिर्द्वारैश्च रुचिरैर्वृतम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह महल चांदी की परत चढ़ी हुई चित्रकारी, स्वर्ण जड़ित दरवाजे, विशाल, अद्भुत बरामदे और सुंदर द्वारों से सुसज्जित था।
 
That palace was adorned with silver plated paintings, gold studded doors, and huge, wonderful porches and beautiful gates. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)