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ramayan 5.6.36-38h: पवनपुत्र हनुमान जी ने राक्षसराज रावण के उस भवन में अनेक प्रकार की पालकियाँ, विचित्र लताएँ, चित्रशालाएँ, क्रीड़ागृह, लकड़ी के क्रीड़ा-पर्वत, सुन्दर भवन और यहाँ तक कि दिन में उपयोग होने वाले भवन भी देखे॥36-37 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.6.36-38h 
शिबिका विविधाकारा: स कपिर्मारुतात्मज:।
लतागृहाणि चित्राणि चित्रशालागृहाणि च॥ ३६॥
क्रीडागृहाणि चान्यानि दारुपर्वतकानि च।
कामस्य गृहकं रम्यं दिवागृहकमेव च॥ ३७॥
ददर्श राक्षसेन्द्रस्य रावणस्य निवेशने।
 
 
अनुवाद
पवनपुत्र हनुमान जी ने राक्षसराज रावण के उस भवन में अनेक प्रकार की पालकियाँ, विचित्र लताएँ, चित्रशालाएँ, क्रीड़ागृह, लकड़ी के क्रीड़ा-पर्वत, सुन्दर भवन और यहाँ तक कि दिन में उपयोग होने वाले भवन भी देखे॥36-37 1/2॥
 
Wind's son Hanuman ji saw many types of palanquins, strange creeper-houses, picture galleries, playhouses, wooden play-mountains, beautiful mansions and even day-use mansions in that mansion of the demon king Ravana. 36-37 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)