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ramayan 5.6.3: जैसे सिंह विशाल वन की रक्षा करते हैं, वैसे ही रावण के महल की रक्षा अनेक भयंकर राक्षस कर रहे थे। उस महल का निरीक्षण करते हुए कपि कुंज हनुमान जी मन ही मन प्रसन्न होने लगे॥3॥   |   ramayan सर्ग 5.6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.6.3 
रक्षितं राक्षसैर्भीमै: सिंहैरिव महद् वनम्।
समीक्षमाणो भवनं चकाशे कपिकुञ्जर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जैसे सिंह विशाल वन की रक्षा करते हैं, वैसे ही रावण के महल की रक्षा अनेक भयंकर राक्षस कर रहे थे। उस महल का निरीक्षण करते हुए कपि कुंज हनुमान जी मन ही मन प्रसन्न होने लगे॥3॥
 
Just like lions protect a huge forest, similarly many fearsome demons were protecting Ravana's palace. While inspecting that palace, Kapi Kunj Hanuman ji started feeling happy in his heart. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)