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ramayan 5.6.2: अपार बल और तेज से संपन्न पवनपुत्र रावण के महल में पहुँचा, जो चारों ओर से सूर्य के समान चमकती हुई स्वर्णमयी दीवारों से घिरा हुआ था॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.6.2 
आससाद च लक्ष्मीवान् राक्षसेन्द्रनिवेशनम्।
प्राकारेणार्कवर्णेन भास्वरेणाभिसंवृतम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
अपार बल और तेज से संपन्न पवनपुत्र रावण के महल में पहुँचा, जो चारों ओर से सूर्य के समान चमकती हुई स्वर्णमयी दीवारों से घिरा हुआ था॥2॥
 
Endowed with immense strength and glory, the prince of wind reached the palace of the demon king Ravana, which was surrounded on all sides by golden walls shining like the sun. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)