श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.6.15 
लंकाभरणमित्येव सोऽमन्यत महाकपि:।
चचार हनुमांस्तत्र रावणस्य समीपत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर महाबली हनुमानजी ने उस भवन को लंका का श्रृंगार समझा और तत्पश्चात् रावण के उस भवन के चारों ओर घूमने लगे॥15॥
 
Seeing this Hanuman, the great monkey, considered that building as the ornament of Lanka. Thereafter he started roaming around that building of Ravana.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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