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ramayan 5.6.10: वहाँ रत्नमयी कन्याएँ सदैव प्रसन्न रहती थीं। सुन्दर आभूषणों की झनकार से गूंजता हुआ राक्षसराज का वह महल समुद्र की कल-कल ध्वनि के समान ध्वनि करता था। 10॥   |   ramayan सर्ग 5.6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 6: हनुमान जी का रावण तथा अन्यान्य राक्षसों के घरों में सीताजी की खोज करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.6.10 
मुदितप्रमदारत्नं राक्षसेन्द्रनिवेशनम्।
वराभरणसंह्रादै: समुद्रस्वननि:स्वनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रत्नमयी कन्याएँ सदैव प्रसन्न रहती थीं। सुन्दर आभूषणों की झनकार से गूंजता हुआ राक्षसराज का वह महल समुद्र की कल-कल ध्वनि के समान ध्वनि करता था। 10॥
 
The jewel-like girls there were always happy. That palace of the demon king, resounding with the tinkling sounds of beautiful ornaments, used to sound like the sound of the sea. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)