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ramayan 5.59.7-8: मैं अकेला ही राक्षसों सहित सम्पूर्ण लंकापुरी का विनाश करने और महाबली रावण का वध करने के लिए पर्याप्त हूँ। फिर यदि मुझे आप जैसे वीर, बलवान, शुद्धात्मा, पराक्रमी और विजय की इच्छा रखने वाले, समस्त अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता वानरों का सहयोग मिल जाए, तो और क्या कहा जा सकता है॥ 7-8॥   |   ramayan सर्ग 5.59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.59.7-8 
अहमेकोऽपि पर्याप्त: सराक्षसगणां पुरीम्।
तां लङ्कां तरसा हन्तुं रावणं च महाबलम्॥ ७॥
किं पुन: सहितो वीरैर्बलवद्भि: कृतात्मभि:।
कृतास्त्रै: प्लवगै: शक्तैर्भवद्भिर्विजयैषिभि:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मैं अकेला ही राक्षसों सहित सम्पूर्ण लंकापुरी का विनाश करने और महाबली रावण का वध करने के लिए पर्याप्त हूँ। फिर यदि मुझे आप जैसे वीर, बलवान, शुद्धात्मा, पराक्रमी और विजय की इच्छा रखने वाले, समस्त अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता वानरों का सहयोग मिल जाए, तो और क्या कहा जा सकता है॥ 7-8॥
 
Even I alone am sufficient to destroy the entire Lankapuri along with the demons and kill the mighty Ravana. Then if I get the help of brave, strong, pure souled, powerful and victory-desiring monkeys like you who know all the weapons, then what more can be said.॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)