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ramayan 5.59.10: यद्यपि युद्ध में इन्द्रजित के ब्रह्म, रौद्र, वायव्य और वरुण आदि अस्त्र अदृश्य हैं - वे किसी को दिखाई नहीं देते, तथापि ब्रह्माजी के वरदान से मैं उनसे छुटकारा पाकर दैत्यों का नाश कर दूँगा॥10॥   |   ramayan सर्ग 5.59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 59: हनुमान जी का सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.59.10 
ब्राह्ममस्त्रं च रौद्रं च वायव्यं वारुणं तथा।
यदि शक्रजितोऽस्त्राणि दुर्निरीक्ष्याणि संयुगे।
तान्यहं निहनिष्यामि विधमिष्यामि राक्षसान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि युद्ध में इन्द्रजित के ब्रह्म, रौद्र, वायव्य और वरुण आदि अस्त्र अदृश्य हैं - वे किसी को दिखाई नहीं देते, तथापि ब्रह्माजी के वरदान से मैं उनसे छुटकारा पाकर दैत्यों का नाश कर दूँगा॥10॥
 
Although Indrajit's weapons like Brahm, Raudra, Vayavya and Varun etc. are invisible in the war - they are not visible to anyone, yet with the boon of Lord Brahma, I will get rid of them and destroy the demons. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)