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ramayan 5.58.99: यशस्विनी! पुरुषसिंह दशरथनन्दन, श्री राम ने आपको पहचान के लिए यह मुद्रिका दी है। 99॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.99 
इदं तु पुरुषव्याघ्र: श्रीमान् दाशरथि: स्वयम्।
अङ्गुलीयमभिज्ञानमदात् तुभ्यं यशस्विनि॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
यशस्विनी! पुरुषसिंह दशरथनन्दन, श्री राम ने आपको पहचान के लिए यह मुद्रिका दी है। 99॥
 
Yashswini! Purush Singh Dashrathanandan, Shri Ram has given you this ring for identification. 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)