Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.58.9-10h: आगे बढ़ते हुए मैंने एक अत्यंत सुंदर, दिव्य, स्वर्णिम शिखर को अपने मार्ग में खड़ा देखा। वह मेरी यात्रा में एक भयंकर बाधा के समान प्रतीत हुआ। मैंने उसे साक्षात् बाधा ही समझा॥9 1/2॥ | ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गच्छतश्च हि मे घोरं विघ्नरूपमिवाभवत्।
काञ्चनं शिखरं दिव्यं पश्यामि सुमनोहरम्॥ ९॥
स्थितं पन्थानमावृत्य मेने विघ्नं च तं नगम्।
अनुवाद
आगे बढ़ते हुए मैंने एक अत्यंत सुंदर, दिव्य, स्वर्णिम शिखर को अपने मार्ग में खड़ा देखा। वह मेरी यात्रा में एक भयंकर बाधा के समान प्रतीत हुआ। मैंने उसे साक्षात् बाधा ही समझा॥9 1/2॥
‘As I moved forward I saw a very beautiful, divine, golden peak standing in my way. It seemed like a terrible obstacle to my journey. I considered it to be an obstacle personified.॥ 9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥