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ramayan 5.58.8: ‘तुम्हारे सामने ही मैं समुद्र के दक्षिण तट पर जाने की इच्छा से महेन्द्र पर्वत की चोटी से आकाश में कूद पड़ा था ॥8॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.8 
प्रत्यक्षमेव भवतां महेन्द्राग्रात् खमाप्लुत:।
उदधेर्दक्षिणं पारं काङ्क्षमाण: समाहित:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारे सामने ही मैं समुद्र के दक्षिण तट पर जाने की इच्छा से महेन्द्र पर्वत की चोटी से आकाश में कूद पड़ा था ॥8॥
 
‘In front of you, I had jumped into the sky from the peak of Mahendra Parvat with the desire to go to the south shore of the sea. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)