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ramayan 5.58.73-74h: तुम भगवान् श्री राम के समान नहीं हो सकते। तुम तो उनके सेवक होने के भी योग्य नहीं हो। श्री रघुनाथजी सर्वथा अजेय, सत्यवादी, पराक्रमी और युद्धप्रिय हैं।॥73 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.73-74h 
न त्वं रामस्य सदृशो दास्येऽप्यस्य न युज्यसे॥ ७३॥
अजेय: सत्यवाक् शूरो रणश्लाघी च राघव:।
 
 
अनुवाद
तुम भगवान् श्री राम के समान नहीं हो सकते। तुम तो उनके सेवक होने के भी योग्य नहीं हो। श्री रघुनाथजी सर्वथा अजेय, सत्यवादी, पराक्रमी और युद्धप्रिय हैं।॥73 1/2॥
 
‘You cannot be equal to Lord Shri Ram. You are not even worthy of being his servant. Shri Raghunathji is absolutely invincible, truthful, valiant and a lover and admirer of war.’॥ 73 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)