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ramayan 5.58.7: जाम्बवान के ऐसा पूछने पर हनुमान्‌जी के शरीर में उत्तेजना उत्पन्न हो गई। उन्होंने मन ही मन सीतादेवी को सिर नवाकर इस प्रकार कहा॥7॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.7 
स नियुक्तस्ततस्तेन सम्प्रहृष्टतनूरुह:।
नमस्यन् शिरसा देव्यै सीतायै प्रत्यभाषत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जाम्बवान के ऐसा पूछने पर हनुमान्‌जी के शरीर में उत्तेजना उत्पन्न हो गई। उन्होंने मन ही मन सीतादेवी को सिर नवाकर इस प्रकार कहा॥7॥
 
When Jambavan asked this, Hanuman ji's body got excited. He bowed his head to Sita Devi in ​​his mind and said thus: 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)