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श्लोक  5.58.47-48h 
अस्तं दिनकरे याते रक्षसां निलयं पुरीम्॥ ४७॥
प्रविष्टोऽहमविज्ञातो रक्षोभिर्भीमविक्रमै:।
 
 
अनुवाद
सूर्यदेव के पश्चिम दिशा में चले जाने पर मैं राक्षसों के निवास लंकापुरी में प्रविष्ट हुआ, किन्तु वे भयानक एवं बलवान राक्षस मेरे विषय में कुछ भी पता न लगा सके।
 
After the Sun God went to the west, I entered Lankapuri, the abode of the demons, but those terrifying and powerful demons could not find out anything about me. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)