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ramayan 5.58.42: परन्तु उसका विशाल और भयानक मुख भी मुझे खाने के लिए मचलने लगा। वह न मुझे जानता था, न मेरी शक्ति को, और न मेरे छल को ही वह समझ पाया ॥42॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.42 
तस्याश्चास्यं महद् भीमं वर्धते मम भक्षणे।
न तु मां सा नु बुबुधे मम वा विकृतं कृतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उसका विशाल और भयानक मुख भी मुझे खाने के लिए मचलने लगा। वह न मुझे जानता था, न मेरी शक्ति को, और न मेरे छल को ही वह समझ पाया ॥42॥
 
‘But his huge and terrifying mouth also started moving to devour me. He did not know me or my power and he did not understand the deceit I had used. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)