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ramayan 5.58.32: 'तब मैं शीघ्रतापूर्वक सुरसा के मुख में प्रवेश करके तुरन्त ही बाहर आ गया। उस समय दिव्य रूप में स्थित सुरसा देवी ने मुझसे कहा -॥32॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.32 
अभिपत्याशु तद्वक्त्रं निर्गतोऽहं तत: क्षणात् ।
अब्रवीत् सुरसा देवी स्वेन रूपेण मां पुन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'तब मैं शीघ्रतापूर्वक सुरसा के मुख में प्रवेश करके तुरन्त ही बाहर आ गया। उस समय दिव्य रूप में स्थित सुरसा देवी ने मुझसे कहा -॥32॥
 
‘Then I quickly entered Surasa's mouth and came out immediately. At that time, Surasa Devi, situated in her divine form, said to me -॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)