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ramayan 5.58.157: फिर मैंने द्वार पर रखी हुई लोहे की छड़ उठाई और उन सभी राक्षसों को मार डाला। इसके बाद मैं बड़े जोर से कूदकर नगर के द्वार पर चढ़ गया। (157)   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.157 
आयसं परिघं गृह्य तानि रक्षांस्यसूदयम्।
ततस्तन्नगरद्वारं वेगेन प्लुतवानहम्॥ १५७॥
 
 
अनुवाद
फिर मैंने द्वार पर रखी हुई लोहे की छड़ उठाई और उन सभी राक्षसों को मार डाला। इसके बाद मैं बड़े जोर से कूदकर नगर के द्वार पर चढ़ गया। (157)
 
‘Then I picked up an iron rod placed on the gate and killed all those demons. After this I jumped with great force and climbed the city gate. 157.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)