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ramayan 5.58.14: मेरा नाम मैनाक है और मैं यहाँ समुद्र में रहता हूँ। बेटा! पूर्वकाल में सभी बड़े-बड़े पर्वत पंख वाले होते थे॥14॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.14 
मैनाकमिति विख्यातं निवसन्तं महोदधौ।
पक्षवन्त: पुरा पुत्र बभूवु: पर्वतोत्तमा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मेरा नाम मैनाक है और मैं यहाँ समुद्र में रहता हूँ। बेटा! पूर्वकाल में सभी बड़े-बड़े पर्वत पंख वाले होते थे॥14॥
 
‘My name is Mainak and I live here in the ocean. Son! In the olden days all the great mountains used to have wings.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)