Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.58.138: जब मैं ऋष्यमूक पर्वत पर रहता था, जो बहुत से वृक्षों से हरा-भरा था, उन दिनों युद्ध में महान पराक्रम दिखाने वाले रघुनाथजी ने मुझसे मित्रता स्थापित की थी॥138॥ | ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वसतो ऋष्यमूके मे पर्वते विपुलद्रुमे।
राघवो रणविक्रान्तो मित्रत्वं समुपागत:॥ १३८॥
अनुवाद
जब मैं ऋष्यमूक पर्वत पर रहता था, जो बहुत से वृक्षों से हरा-भरा था, उन दिनों युद्ध में महान पराक्रम दिखाने वाले रघुनाथजी ने मुझसे मित्रता स्थापित की थी॥138॥
When I used to live on the Rishyamuka mountain which was lush green with numerous trees, in those days Raghunathji, who displayed great valour in the battle, established friendship with me.॥ 138॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥