Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.58.132-133: इस प्रकार मुझे पकड़कर वे रावण के पास ले आए। मुझे देखकर दुष्टबुद्धि रावण ने बातचीत आरम्भ की और पूछा, ‘तुम लंका में क्यों आए हो? और राक्षसों का वध क्यों किया?’ मैंने उत्तर दिया, ‘मैंने यह सब सीताजी के लिए किया है।’॥132-133॥ | ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रावणस्य समीपं च गृहीत्वा मामुपागमन्।
दृष्ट्वा सम्भाषितश्चाहं रावणेन दुरात्मना॥ १३२॥
पृष्टश्च लङ्कागमनं राक्षसानां च तं वधम्।
तत्सर्वं च रणे तत्र सीतार्थमुपजल्पितम्॥ १३३॥
अनुवाद
इस प्रकार मुझे पकड़कर वे रावण के पास ले आए। मुझे देखकर दुष्टबुद्धि रावण ने बातचीत आरम्भ की और पूछा, ‘तुम लंका में क्यों आए हो? और राक्षसों का वध क्यों किया?’ मैंने उत्तर दिया, ‘मैंने यह सब सीताजी के लिए किया है।’॥132-133॥
Having caught me like this, they brought me to Ravana. Seeing me, the evil-minded Ravana started a conversation and asked, 'Why did you come to Lanka? And why did you kill the demons?' I replied, 'I have done all this for Sitaji.'॥ 132-133॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥