Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.58.130-131: जब इन्द्रजित ने देखा कि मेरी सारी सेना नष्ट हो गई है, तब उसने सोचा कि इस वानर का सामना करना असम्भव है। अतः उसने बड़े जोर से ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके मुझे बाँध लिया। फिर वहाँ उपस्थित दैत्यों ने भी मुझे रस्सियों से बाँध लिया॥130-131॥ | ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽविषह्यं हि मां बुद्ध्वा स्वसैन्यं चावमर्दितम्॥ १३०॥
ब्रह्मणोऽस्त्रेण स तु मां प्रबद्ध्वा चातिवेगिन:।
रज्जुभिश्चापि बध्नन्ति ततो मां तत्र राक्षसा:॥ १३१॥
अनुवाद
जब इन्द्रजित ने देखा कि मेरी सारी सेना नष्ट हो गई है, तब उसने सोचा कि इस वानर का सामना करना असम्भव है। अतः उसने बड़े जोर से ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके मुझे बाँध लिया। फिर वहाँ उपस्थित दैत्यों ने भी मुझे रस्सियों से बाँध लिया॥130-131॥
When Indrajit saw that my entire army was crushed, he realized that it was impossible to face this monkey. So he used Brahmastra with great force and tied me up. Then the demons there tied me up with ropes too.॥ 130-131॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥