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ramayan 5.58.113: हे पराक्रमी राक्षसराज! एक दुष्टचित्त वानर ने आपके बल और पराक्रम की परवाह न करके इस दुर्गम प्रमध वन को नष्ट कर दिया है॥113॥   |   ramayan सर्ग 5.58: जाम्बवान् के पूछने पर हनुमान जी का अपनी लङ्का यात्रा का सारा वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.58.113 
राजन् वनमिदं दुर्गं तव भग्नं दुरात्मना।
वानरेण ह्यविज्ञाय तव वीर्यं महाबल॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी राक्षसराज! एक दुष्टचित्त वानर ने आपके बल और पराक्रम की परवाह न करके इस दुर्गम प्रमध वन को नष्ट कर दिया है॥113॥
 
Mighty demon king! An evil-minded monkey, without caring about your strength and valour, has destroyed this inaccessible forest of Pramadha.॥ 113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)