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श्लोक  5.58.105 
ततस्तस्यै प्रणम्याहं राजपुत्र्यै समाहित:।
प्रदक्षिणं परिक्राममिहाभ्युद‍्गतमानस:॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
फिर, यहाँ आने के लिए उत्सुक होकर, मैंने राजकुमारी सीता को प्रणाम करने पर ध्यान केंद्रित किया और घड़ी की दिशा में उनके चारों ओर परिक्रमा की।
 
Then, being eager to come here, I concentrated on paying my obeisance to Princess Sita and circled around her in a clockwise direction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)