श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  5.57.46-47h 
जीवितस्य प्रदाता नस्त्वमेको वानरोत्तम॥ ४६॥
त्वत्प्रसादात् समेष्याम: सिद्धार्था राघवेण ह।
 
 
अनुवाद
कपिशिरोमणि! आप ही हमें जीवन देने वाले हैं। आपकी कृपा से ही हम सभी अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे और भगवान राम से मिल सकेंगे। 46 1/2
 
Kapishiromane! You alone are the giver of life to us. It is only by your grace that all of us will be able to achieve our goals and meet Lord Rama. 46 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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