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ramayan 5.57.45-46h: हे वानरश्रेष्ठ! बल और पराक्रम में कोई भी आपके समान नहीं है; क्योंकि आप इस विशाल सागर को पार करके पुनः इस ओर आये हैं।   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  5.57.45-46h 
सत्त्वे वीर्ये न ते कश्चित् समो वानर विद्यते॥ ४५॥
यदवप्लुत्य विस्तीर्णं सागरं पुनरागत:।
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! बल और पराक्रम में कोई भी आपके समान नहीं है; क्योंकि आप इस विशाल सागर को पार करके पुनः इस ओर आये हैं।
 
O best of the monkeys! No one is equal to you in strength and valour; because you crossed this vast ocean and then returned to this side. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)