श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  5.57.44-45h 
उक्तवाक्यं हनूमन्तमङ्गदस्तु तदाब्रवीत्॥ ४४॥
सर्वेषां हरिवीराणां मध्ये वाचमनुत्तमाम्।
 
 
अनुवाद
हनुमान जी के उपर्युक्त वचन सुनकर अंगद ने उस समय समस्त वीर वानरों में यह परम उत्तम बात कही - ॥44 1/2॥
 
On hearing the above words of Hanuman ji, Angada said this most excellent thing among all the brave monkeys at that time - ॥ 44 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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