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ramayan 5.57.43-44h: बहुत से वानर प्रसन्नता से भरकर वानरराज श्रीमान हनुमानजी को छूने के लिए पर्वत शिखरों पर कूदने लगे।   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.57.43-44h 
अपरे तु हनूमन्तं श्रीमन्तं वानरोत्तमम्॥ ४३॥
आप्लुत्य गिरिशृङ्गेषु संस्पृशन्ति स्म हर्षिता:।
 
 
अनुवाद
बहुत से वानर प्रसन्नता से भरकर वानरराज श्रीमान हनुमानजी को छूने के लिए पर्वत शिखरों पर कूदने लगे।
 
Many monkeys filled with joy began jumping on the mountain peaks to touch the king of the monkeys, Sriman Hanuman. 43 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)