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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  5.57.42-43h 
केचिदुच्छ्रितलाङ्गूला: प्रहृष्टा: कपिकुञ्जरा:॥ ४२॥
आयताञ्चितदीर्घाणि लाङ्गूलानि प्रविव्यधु:।
 
 
अनुवाद
कई कपि कुंजर प्रसन्न होकर अपनी पूँछ उठाकर नाचने लगे। कई अपनी लंबी और मोटी पूँछें घुमाने या हिलाने लगे।
 
Many Kapi Kunjars were delighted and started dancing with their tails raised. Many started twirling or shaking their long and thick tails.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)